About Us
जेएसजेपी वेलफेयर फाउंडेशन एक गैर-लाभकारी संगठन है जो पर्यावरण और समाज दोनों पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए समर्पित है।
एक हरित और अधिक करुणामयी दुनिया के निर्माण की दृष्टि से स्थापित, यह फाउंडेशन दो प्रमुख उद्देश्यों पर्यावरण संरक्षण और मानवीय सहायता को पूरा करने के लिए अथक प्रयास करता है। इसकी प्रमुख पहलों में से एक वृक्षारोपण अभियान है। जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्रदूषण कम करने और जैव विविधता को पुनर्स्थापित करने की तत्काल आवश्यकता को समझते हए, जेएसजेपी नियमित रूप से शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में वृक्षारोपण अभियान चलाता है। ये प्रयास न केवल वाँयु की गुणवत्ता में सुधार करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक स्वस्थ और टिकाऊ रहने की जगह भी बनाते हैं। अपने पर्यावरणीय कार्यों के अलावा, फाउंडेशन जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भोजन, कपड़े और बुनियादी जरूरतें प्रदान करने से लेकर शैक्षिक और स्वास्थ्य सेवा सहायता प्रदान करने तक, जेएसजेपी वंचित समुदायों के उत्थान और जरूरतमंद लोगों के लिए आशा का संचार करने के लिए काम करता है। करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और टीम वर्क के मूल्यों से प्रेरित, जेएसजेपी वेलफेयर फाउंडेशन व्यक्तियों और संगठनों को अपने मिशन में हाथ मिलाने के लिए प्रोत्साहित करता है। पर्यावरणीय कार्रवाई को मानवीय देखभाल के
साथ जोड़कर, फाउंडेशन एक स्वच्छ, हरित और दयालु दुनिया की कल्पना करता है जहां प्रकृति और मानवता दोनों एक साथ पनपते हैं।
उदेस्य: :-
1.प्राकृतिक तालाबों और झीलों का सौंदर्गीकरण और संरक्षण तथा वृक्षारोपण को बढ़ावा देना। स्थानीय क्षेत्रों, पाकों और जल निकायों में कूड़े और मलबे को हटाने के लिए नियमित सफाई गतिविधियों का आयोजन करना।
2.अपशिष्ट पदार्थों को न्यूनतम करने और प्राकृतिक संसाधनों की पुनर्प्राप्ति को अधिकतम करने को बढ़ावा देना।
3. प्रदूषण को कम करने के लिए अपशिष्ट पृथक्करण और पुनर्चक्रण जैसे उचित अपशिष्ट निपटान विधियों की स्थापना करना।
4. वायु गुणवत्ता में सुधार, ध्वनि प्रदूषण को कम करने और मनोरंजन क्षेत्र प्रदान करने के लिए हरित स्थान, पार्क और शहरी उद्यान बनाना और उनका रखरखाव करना।
5.वनीकरण, वन्यजीव गलियारे और आवास बहाली जैसे संरक्षण प्रयासों के माध्यम से लुप्तप्राय प्रजातियों और उनके आवासों की रक्षा करना।
6. आर्द्रभूमि, जंगल और घास के मैदान जैसे बिगड़े हुए पारिस्थितिकी तंत्रों को उनकी मूल स्थिति में बहाल करना।
7. सांस्कृतिक पहचान और पारिस्थितिक अखंडता को बनाए रखने के लिए प्राचीन स्मारकों, विरासत भवनों और पारंपरिक तालाबों और गांवों जैसे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को सरक्षित करना।
8. समाज के दलित, पिछडे वर्ग तथा आर्थिक रुप से कमजोर वर्गों के उत्थान के लिये निःशुल्क शिक्षण संस्थाओं की स्थापना करना जिसमें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षण संस्थान, कम्प्यूटर शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग संस्थान की स्थापना तथा संचालन करना शामिल है।
9.भारत सरकार व राज्य सरकार दवारा संचालित जनहितार्थ कल्याणकारी योजनाओं के बारे में आम जनमानस को जागरुक करना तथा पात्र परिवारों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभपहुंचाने हेतु कार्य करना।
10. सांस्कृतिक विरासत की पहचान वाले पर्व जैसें सूर्य उपासना का पर्व छठ पूजा आदि का आयोजन करना तथा समाज के अधिकाधिक परिवारों को उससे जोड़ने का कार्य करना।
11. भारत के महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पर्व तथा महामानव के जन्मदिवस अवसरों पर आम जन मानस को जाग्रत करने हेतु भव्य आयोजन करना तथा उनके बारे में व्यापक प्रचार करना।
12. प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने हेतु जैविक उर्वरक एवं देशी बीज के प्रयोग को बढ़ावा देना तथा वैज्ञानिक तरीके से खेती करने हेतु सीमान्त कृषिकों तथा कृषि श्रमिकों को उचित निशुल्क प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करना।
13. समाज कल्याण विभाग, सूडा, दूढा, नाबार्ड, महिला कल्याण एवं बाल विकास विभाग, खाहा एवं रसद, आपूर्ति विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सम्बन्धित परिवारों तक पहुंचाना एवं उनका प्रचार प्रसार।
14. ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम विकास की मदद से महिला सशक्तिकरण को बल प्रदान करने हेतु तथा महिलाओं के आर्थिक स्वलंबन हेतु महिला समूहों का गठन करना, उनका वित्त पोषण तथा उचित कुशल प्रशिक्षण प्रदान करना एवं शासकीय अनुदानों का लाम पहुंचा कर उन्हें उहामी बनाना।
15. पल्स पोलियो ड्रॉप, एड्स, हैपेटाइटिस, मधुमेह, नशा मुक्ति, कुष्ठ रोग, मलेरिया आदि रोगों की पहचान, जांच कर उनकी रोकथाम के उपाय करना तथा जागरूकता शिविरों का आयोजन करना उनका उन्मूलन करना।
16.प्राकृतिक आपदा जैसे महामारी, बाढ़, अग्निकांड, ओलावृष्टि, तूफान, भूकम्प, सडक दुर्घटना आदि के समय पीड़ित व्यक्तियों की यथा सम्भव मदद करना।
17. आर्थिक रूप से कमजोर तथा समाजिक रूप से पिछडे परिवारों के बालिग कन्याओं के विवाह हेतु आर्थिक एवं सामाजिक मदद प्रदान करना।
18. समाज के विकलांग व्यक्तियों जिसमें शारीरिक, मानसिक, मूक बधिर, नेत्रहीन व्यक्ति शामिल हैं, के उत्थान हेतु शैक्षिक एवं व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना करना, उन्हें ट्राईसाईकिल तथा अन्य तकनीकी उपकरण उपलब्ध कराना।
19. समाज के बराक व्यकियों के आश्रय हेतु अस्थायी / स्थायी गृहों जैसे रैनबसेरा तथा वृद्धाश्रम आदि की स्थापना करना तथा इनके स्वास्थ्य के देखमाल हेतु समुचित प्रबन्ध करना।
20. देश के सांस्कृतिक विरासत के संक्षण हेतु भारतीय परम्परा के नृत्य, गायन, वादन, वित्रकला, शिल्पकला, लोकला तथा विभिन्न विपाजों के प्रवार प्रसार हेतु रवनात्मक प्रशिक्षण कार्यशालाबों का आयोजन करना।